हम सफर
Friday, April 18th, 2008 हम सफर
18/4/2008 Prdip Brahmbhatt
हम सफर बनके चले तो जींदगी है खुशहाल
साथ तेरा जींदगी भरका हम कैसे रहे बेहाल
सजनीप्यार तेरा बेमीशाल
जीसपे दीलमेराहै कुरबान
अपनी नाकोइ सोच जीसपे दिलतेरा थोडाखचके
चाल तेरी जबभी देखु दील मेरा तब लगे डोले
महेंके जीवन मेरा आज
संगे मेरे मेरा हो दिलदार
ना अपनी कोइ पहेचानथी भटक रहे थे हम
तुने दिलको थाम लीया साथी बने अब तुम
प्यारकी राह तुने दीखलायी
मुस्कुरा रहा मेरा जीवन
तुने आकर मेरेजीवनकी दोर पकडली दीलसे
समजना पाया संसारीजीवन महेकरहाजोतुमसे
वक्त नही अब पास हीमेरे
तेरे संगजीवन मेरा जुडा
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