सात संबंध
२२/५/१९८७ सात संबंध प्रदीप ब्रह्मभट्ट
जींदगी की राह पर, हमे आज चलना है,
हो सके तो साथी बनकर साथ निभाना है.
..जींदगी की राह पर
एक हमारी नेकी है जिसे जीवनमे अपनाया है,
आगे जाकर खुद ही मंझील पहुच तो जाना है.
..जींदगी की राह पर
दो हमारेसच्चे साथी जीसका साथ कदी ना छुटे,
आ गयेजो ये हमारी बाहोमे कोई कभी ना छुटे.
..जींदगी की राह पर
तीन काम है हमको करने सच्ची राहपे चलके,
झुठ ना बोले बुरा ना देखे सत्यका ले सहारा.
..जींदगी की राह पर
चार हमारी मांग है प्यारसे खाने दो हमे जीने दो,
सच्चा न्याय मिले तो ये प्यारकी ज्योत सदाजले.
..जींदगी की राह पर
पांच हमारे कर्म है जो सन्मार्गो से भरे रहे,
पंचकर्म है जग में महान ऐसे जीवनको सलाम.
..जींदगी की राह पर
छह हमरे बंधन है मातापिताका जन्मसे नाता,
भाई-बहेनका कर्म से नाता बेटा-बेटीसे रुहाई.
..जींदगी की राह पर.
सातवा बंधन जन्मोजन्मका सात फेरेमे कह जाये.
सच्चे प्यारका ये बंधन मुक्तिका जन्मोसे देता आये
..जींदगी की राह पर.
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August 4th, 2007 at 9:57 am
saras